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महावीर जिनालय हेतु भूमि इन्दौर क्लॉथ मार्केट मध्यमवर्गीय गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित गुमाश्ता नगर द्वारा समाज को उपलब्ध कराई गई। इस जिनालय के निर्माण में प्रमुख भूमिका समाज अध्यक्ष श्री हीरालालजी झांझरी एवं मंत्री श्री कैलाशचंदजी पाटोदी एवं गुमाश्ता नगर में उस समय निवास कर रहे दिगम्बर जैन परिवारों की रही।
इन्दौर के इतिहास में यह प्रथम जिनालय है जहाँ तीन बार पंचकल्याणक महोत्सव हुए एवं चौथा पंचकल्याणक एक दिवसीय मुनि श्री प्रार्थना सागरजी महाराज के सानिध्य में हुआ। तेरहपंथ आम्नाय से पूजन पद्धति प्रचलित है। प्रारंभ से लेकर आज तक महिलाओं एवं पुरूषों द्वारा सामूहिक पूजन नित्य होते आ रहे हैं। श्री प्रतिपालजी टोंग्या अध्यक्ष, श्री सुभाष सेठिया महामंत्री, श्री लामचंदजी जैन कोषाध्यक्ष के नेतृत्व में तृतीय पंचकल्याणक महोत्सव दिनांक 23.01.2017 को आचार्य श्री प्रज्ञासागरजी महाराज के सानिध्य में पं. श्री प्रदीपजी ‘मधुर’ मुम्बई द्वारा सम्पन्न हुआ। 2 पाषाण और 2 रजत प्रतिमाएँ स्थापित की गई।
वर्ष 2018-19 में संत निवास हेतु 4 कमरे बनाए गए एवं श्री नेमिनाथ भगवान के शिखर को नया स्वरूप देकर ऊँचाई बढ़ाई एवं महावीर भगवान के शिखर पर भी नवीन शिखर बनाया गया। वर्ष 2021 में महावीर परिसर में कुंए का निर्माण हुआ। वर्ष 2022 में मंदिर से लगी हुई खुली जमीन जो मंदिर सहित लगभग 20000 वर्गफीट है। गुमाश्ता नगर सोसायटी से सामाजिक एवं धार्मिक कार्य हेतु 90 वर्ष की लीज पर आबंटित कराकर कब्जा लिया गया।
प्रबंध व्यवस्था दिगम्बर जैन समाज गुमाश्ता नगर द्वारा गठित चयनित समिति द्वारा किया जाता है। आय का स्त्रोत सदस्यों से प्राप्त वार्षिक लागा, गुप्त भंडार एवं दान से प्राप्त राशि है। कोषाध्यक्ष श्री लाभचंदजी जैन का सेवा कार्य विगत 16 वर्षो से निष्पक्ष, विश्वसनीयता एवं पूर्ण पारदर्शिता द्वारा सम्पन्न किया जा रहा है। दिगम्बर जैन समाज इन्दौर के इतिहास में समाज द्वारा अधिकृत साधारण सभा में प्रजातांत्रिक तरीके से मतदान कराकर दिनांक 10.02.1996 को सामाजिक संसद से प्रथम अध्यक्ष बनने का सौभाग्य गुमाश्ता नगर के स्व. श्री हीरालालजी झांझरी को प्राप्त हुआ।
जिनालय में वर्ष 1999 में प्रवचन हाल एवं स्वाध्याय कक्ष का निर्माण होकर साधु-संतों एवं त्यागी-वृत्तियों को ठहरने की सुविधा भी पृथक से प्रथम मंजिल पर उपलब्ध कराई है। जिनालय के निर्माण में तकनीकी परामर्श एवं रूपांकन इंजिनियर श्री ओ. एन. सोनी, श्री प्रकाशचंदजी गुलाबचंदजी बड़जात्या (चौमूं वाले) एवं इंजि श्री कैलाशजी वेद का सहयोग समय-समय पर मिला है।
स्व. श्री हीरालालजी झांझरी एवं स्वं. श्री कैलाशचंदजी पाटोदी के अथक प्रयासों से जिनालय की अतिरिक्त भूमि एवं महावीर परिसर की भूमि लीज पर प्राप्त की गई एवं बगीचे में कम्पाउण्ड वाल बनाकर सौन्दर्यीकरण किया गया। तृतीय अध्यक्ष श्री विरेन्द्र अजमेरा एवं सचिव श्री सुभाष सेठिया के नेतृत्व में संत निवास एवं बगीचे में स्टेज का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। पं. श्री रतनलालजी शास्त्री का निर्देशन रहा।
श्री घासीलालजी अग्रवाल अध्यक्ष, श्री सुभाषजी सेठिया सचिव एवं कोषाध्यक्ष श्री लाभचंदजी जैन के कार्यकाल में दोनों जिनालयों के मध्य भूमि पर विशाल स्वाध्याय हाल का निर्माण कराया गया एवं वर्तमान अध्यक्ष श्री प्रतिपालजी टोंग्या, सचिव श्री सुभाषजी सेठिया एवं कोषाध्यक्ष श्री लाभचंदजी जैन के कार्यकाल में मंदिर को लाल पत्थर के एलिवेशन से पूर्ण किया गया। इस निर्माण एवं एलिवेशन में इंजि. श्री पंकज सेठिया का योगदान रहा।